इश्क़

जंग लड़नी हो मोहब्बत की तो भरोसा खुद पर रखो,
मेहबूब पर पाबंदियां लगाकर इश्क़ नहीं मिलता,
जिस्म हाशिल कर भी लो पर रूह से रूह एहसास नहीं मिलता !

शिवा की कलम से.. 🖋️

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सीमा पर..

निकल पड़ा मैं तो सीमा पर, लड़ने उन गद्दारों से!
हां निकल पड़ा मैं तो सीमा पर लड़ने उन गद्दारों से..

खड़ा रहूंगा मैं सीमा पर, अंतिम सांस तक आने पे!
मैं मरता हूं उस सीमा पर, जिन की जान बचाने को..

तुम भी उनकी की रक्षा करना घर के ही गद्दारों से..
हां तुम भी उनकी की रक्षा करना घर के ही गद्दारों से..

….शिवा की कलम से

न्याय

आप और हम भारत में रहते हैं हमारी मूलभूत आवश्यकताएं रोटी, कपड़ा और मकान है, लेकिन हमें जिस चीज की सबसे ज्यादा उम्मीद होती है वह है न्याय हम उम्मीद करते हैं कि हमें हमेशा न्याय मिले पर आज के वक्त में न्याय मिलना मुश्किल है या आप कह सकते हैं गरीबों को न्याय नहीं मिलता क्योंकि इसकी कीमत देने के लिए गरीबों के पास कुछ नहीं होता, उम्मीद करते हैं भविष्य में यह व्यवस्था बदल जाए और सब को न्याय मिले।